27 अगस्त 2012

श्री गंगाजी पर बांध,हिन्दू महासभा के साथ हुए ब्रिटिश समझौते का उल्लंघन !

        श्री गंगाजी पर बांध,हिन्दू महासभा के साथ हुए ब्रिटिश समझौते का उल्लंघन !
       
हिन्दुओ के लिए चातुर्मास एक पर्व होता है,मल मास के कारन भी पुण्यप्रद नदियों का स्नान एक परंपरा है. कुम्भ पर्व-मकर संक्रांति को भी स्नान की परंपरा रही है. मोक्षदायिनी गंगाजी का आविर्भाव हिन्दू दैवतो से जुड़ा है.गंगोत्री-गोमुख से गंगाजी का प्रवाह अवरूध्द हुवा है. गंगाजी का तीर्थ रूप जल विदेशो में बेचा जा रहा है.प्राकृतिक जल प्रवाह को रोका गया है.ब्रिटिश सरकार द्वारा हिन्दू महासभा के साथ किया समझौता भ्रष्टाचारीयोने नकारा.श्री शंकराचार्य श्री स्वरूपानंदजी, अविमुक्तेश्वरानंदजी महाराज के साथ सहस्त्रो साधू-संन्यासीयो ने दिल्ली के जंतर मंतर पर १८ जून १२ को सरकार के विरोध में धरना प्रदर्शन किया.स्वामी निगमानंद जैसे अनेक संत-महंत श्रीगंगाजी के लिए प्राण दे चुके है.उपवास किये है परन्तु केंद्र सरकार हिन्दुओ की मान्गोंको अनदेखा कर रही है.                                            
उत्तर-पूर्वोत्तर राज्योंकी दो प्रमुख नदिया गंगा और ब्रह्मपुत्र ! टिहरी बाँध ने और चीन ने हमारी आशाओ को फलित होने से पूर्व ही रौंद दिया है.ब्रह्मपुत्र का पानी रोकना और गंगाजी का प्रवाह हिमालय से मोड़ने का षड़यंत्र हो रहा है.
* अखिल भारत हिन्दू महासभा;गंगा महासभा; B.H.U. के संस्थापक महामना पं.मदन मोहन मालवीय जी के साथ १८-१९ दिसंबर १९१६ को ब्रिटिश सरकार का समझोता हुवा था.
    उपस्थित महानुभाव-महाराजा ग्वालियर,जयपुर,बीकानेर,पटियाला,अलवर,बनारस,दरभंगा,महाराजा कासिम बाजार मनिन्द्र नंदी प्रथम राष्ट्रिय अध्यक्ष अ.भा.हिन्दू महासभा
              उपस्थित ब्रिटिश अधिकारी-रोज,सचिव भारत सरकार,लोक निर्माण विभाग २)बार्लो मुख्य अभियंता संयुक्त उत्तर प्रान्त ३)स्टैंडले,अधीक्षण अभियंता,सिंचाई ४)कूपर कार्यकारी अभियंता,सिंचाई ५)आर.बर्न,मुख्य सचिव संयुक्त प्रान्त
अखिल भारत हिन्दू महासभा संस्थापक पं.मालवीय जी,राष्ट्रिय महामंत्री लाला सुखबीर सिंह आदि अन्य

* सन १९०९ में गंगा जी पर बाँध का प्रस्ताव हुवा था.परंतु ,१९१४ समझोते में हिन्दू तिर्थालूओंको स्नानार्थ निरंतर अविच्छिन्न पर्याप्त पानी मिलेगा.ऐसा १९१६ अनुच्छेद ३२- i में वचन दिया गया  था, "गंगा की अविरल अविच्छिन्न धारा कभी भी रोकी नहीं जाएगी l" ऐसा लिखा है।                   *२६ सप्तम्बर १९१७ को शासनादेश २७२८/ lll- ४९५ जारी हुवा.लाला सुखबीर सिंह महामंत्री अ.भा. हिन्दू महासभा को भेजे पत्र,उसके अनुच्छेद ३२ भाग ii में कहा गया है कि,
" इसके विपरीत कोई भी कदम हिन्दू समाज से पूर्व परामर्श के बिना नहीं उठाया जायेगा."

            आज स्थिति यह है कि,श्री गंगा जी की पवित्र धारा अवरूध्द-अशुध्द हुई है.मायनिंग का अवैध कारोबार राजाश्रयसे बेरोकटोक जारी है,शहरीकरण का निकास गंगा जी में छोड़ा जा रहा है.कारखानों का अशुध्द निकास गंगाजी में है.शव दहन और अस्थिया-राख के गंगार्पण को हिन्दू विरोधी निशाना बना रहे है.अनेक धर्माचार्य श्री गंगा शुध्दी के लिए व्रत-तप-उपवास कर रहे है परन्तु भीषण समस्या को सुनने केंद्र और राज्य सरकार को समय नहीं है. विदेशी साम्राज्यवाद के सत्ताधारी गुलामो को यह समझना चाहिए की, ब्रिटिश सरकार को हिन्दुओ की मांग को मानना पड़ा था.यह सरकार हिन्दू विरोधी तो है ही, अंततः जाना पड़ेगा हिन्दू संसद आएगी.                                                                                                                                                   राष्ट्रिय विकल्प :- देश में बारह मास प्रवाहित नदिया वर्षा काल में बाढ़ से उग्ररूप धारण करती है. तो,कही सुखा पड जाता है। वर्षा काल में ही बहने वाली नदिया ग्रीष्म में सुखी होती है.भौगोलिक स्थिति के कारण जल असमतोल निर्माण हुवा है.सन १९६५-७६ के बिच एक प्रस्ताव आया गंगा-कावेरी प्रकल्प ! उसमे से अधिक चर्चा कॅप्टन दस्तूर की ' गारलैंड केनोल स्कीम' की तथा दूसरी डॉ.के.एल.राव की 'नैशनल वाटर ग्रिड स्कीम' थी जिसे अधिक मान्यता मिली.गंगा से कावेरी तक २६४० कि.मी.जल प्रवाह से १६८० क्यूमेक्स जल १५० दिन तक बहेगा.यह अनुमान था।
       इस कार्य में समस्या जल को उठाने की है,इस योजना में १४०० क्यूमेक्स जल ५४९ मीटर ऊँचा उठाना पड़ेगा.जिसके लिए ५-७ मेट्रिक किलो वेट बिजली की आवश्यकता है.नर्मदा का जल गुजरात-राजस्थान में फ़ैलाने २७५ मीटर तक उठाना पड़ेगा.गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी प्रवाह एक करने के लिए १८००-३००० क्यूमेक्स जल १२-१५ मीटर तक उठाना पड़ेगा.विद्युत् भार नियमन के कारण यह असंभवसा है.परन्तु,राजस्थान के थार में अब श्री गंगाजी बहेगी ऐसा संकेत है।

       महाराष्ट्र के एक अभियंता श्री.एम्.डी.पोल जी ने १९७६ में 'इरिगेशन पोजेक्ट फॉर इंडिया' दिया था। जिसमे विद्युत् प्रयोग के बदले गुरुत्वकर्षण से गंगा-ब्रह्मपुत्र का जल कन्याकुमारी तक जा सकेगा.उसमे भी सुधार कर उन्होंने ' नैशनल इंटिग्रेटेड वाटर रिसोर्सेस डेवलोपमेंट प्लान फॉर इंडिया' बनाया था।
       हिमालय का जल स्त्रोत रोककर विशिष्ट ऊँचाई पर संचयन कर दार्जिलिंग में लाकर दक्षिण हिन्दुस्थान में घुमाव किया जाने का प्रस्ताव है.जिसमे दार्जिलिंग से रांची ५७५-६५० कि.मी. Underground Pressure Tunnels से २०० से २५० मीटर निचे से गुरुत्वाकर्षण से होकर बहेगा.
          प्राचीन काल में सगर वंशीय भगीरथ ने गंगा भूमि पर प्रवाहित की.अलकनंदा-मन्दाकिनी समेत तिन स्त्रोत एक साथ जोड़कर उत्कृष्ट अभियंता का अविष्कार किया था।'गंगा सागर' यह उनकी ही देन है.उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाह से हरित क्रान्ति तो होगी ही ५७,२२७ मैगावेट की विद्युत् निर्मिती अपेक्षित है.मत्स्योद्योग में बढौतरी होगी तथा उत्तर हिन्दुस्थान में ६७% बाढ़ में कमी आएगी.कृष्णा खोरे प्रकल्प या कोंकण रेल ने ऐसे प्रकल्प को प्रोत्साहित किया है.
          हिमालय से मिलनेवाले जल पर चीन की भी वक्र दृष्टी है,ब्रह्मपुत्र (त्सांगपो) नदी चीन से बहकर अरुणाचल प्रदेश से ईशान्य से हिन्दुस्थान में बहती है उसके प्रवाहो में अणु ध्वम्म कर उसे रोकने का षड्यंत्र हो रहा है और इस ही कारन से अरुणाचल को अपना बनाने का षड्यंत्र उजागर हुवा है.हिमालयीन स्त्रोत अथवा प्रवाह रोकने का भी प्रयास हो सकता है इसलिए उत्तर से दक्षिण गंगा कावेरी प्रवाह को जल्द से जल्द पूरा करने से लागत में भी कमी आएगी.परन्तु सरकार बांध बनाकर कम खर्च में लागत में बचत या भ्रष्टाचार कर रही है यह जाँच का विषय बनेगा।फिर भी यह हिन्दुओ की भावना को ठेंस पंहुचा रही है।
           टिहरी बाँध के निर्माण में स्थानीय लोगो को हानि पहुंचाकर जल स्त्रोत की अनियमितता हुई है.हिन्दू धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाकर गंगा को सुखा-खनन आदि से गटर बहाकर प्रदूषित किया गया है.धर्माचार्योंकी अभ्यर्थना को सरकार अनुलक्षित कर उनके प्राण हर रही है.कुम्भ पर्व में उत्तराखंड सरकार ने महंतोंके स्नान बहिष्कार के आवाहन को रोकने का षड्यंत्र किया था फिर भी  अंतिम स्नान पर कुछ आखाड़ो के संत-महंतों ने बहिष्कार किया और मुख्यमंत्री निशंक को भी सत्ताच्युत होना पड़ा.१९९७ से अभियंता श्री.वीरभद्र मिश्र-वाराणसी गंगा जी को स्वच्छ निर्मल करने के प्रयास में लगे है प्रस्ताव पारित है परन्तु राजनीती आड़े आ रही है . ब्रिटिश हिन्दुस्थान में किये समझौते खंडित हिन्दुस्थान में रद्दी खाते में फेंक दिए है.इसलिए सरकार का विरोध !                                    ( सन्दर्भ-गंगा महासभा जमशेदपुर,झारखण्ड पुस्तिका तथा दिनांक १० अक्तूबर २००० दैनिक सामना में प्रकाशित श्री.सूर्यकांत पलसकरजी के लेख से अनुवादित )

26 जुलाई 2012

आसाम खंडित हिन्दुस्थान में,हिन्दू महासभा की दूरदृष्टि !आज भी अनुकरणीय

       पूर्वोत्तर हिन्दुस्थान के आसाम में ख्रिश्चन मिशनरियो द्वारा हो रहे धर्मान्तरण पर अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रिय अध्यक्ष श्री.वि.दा.सावरकरजी ने चेतावनी पत्र लिखा था।उसी प्रकार 13 जुलाई 1941 को विस्तृत पत्र लिखकर आसाम के हिन्दुओ को पाकिस्तान के षड्यंत्र के अनुसार मुसलमानों की चल रही गतिविधी से अवगत कराकर सावधान रहने की सूचना दी थी।उस पत्र का सारांश,
        " हिन्दुस्थान तथा आसाम के हिन्दुओ का ध्यान मै एक अरिष्ट की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ।आसाम को मुस्लिम बहुल करके हिन्दुओ का जीना दुभर करने की योजना के लिए बंगाल और अन्य प्रान्तोंसे बुलाये मुसलमानों की वसाहत बढाकर क्षेत्र को मुस्लिम बहुल करने के लिए आसाम विधानसभा ने 'भू विकास निर्बंध' पारित किया है। अन्य प्रान्तों से आसाम में हो रही घुसपैठ को रोकने के लिए हिन्दू महासभा ने विरोध करने के पश्चात् भी कांग्रेस मंत्री मंडल ने आसाम के इस्लामीकरण को रोकने को नकारा है।हिन्दू मतदाताओ ने चुनकर भेजे मंत्रीओ ने नवागत मुसलमानों के साथ हिन्दुओ को बराबरी से अधिकार देने से भी मना किया है।हिन्दुओ पर संगठित आक्रमण होते समय उनके जीवित और वित्त की रक्षा के लिए कोई प्रबंध नहीं किया है। नामधारी मिश्र मंत्री मंडल बनाकर उसका नेतृत्व मुस्लिम लीग को सौपा है।इस प्रकार आसाम में मुस्लिम राज्य का मुस्लिम लीग का स्वप्न प्रत्यक्ष में उतारने को इस मंत्री मंडल ने सहयोग प्रदान किया है।
        आसाम के हिन्दू अखिल हिन्दुस्थान के समर्थन से संगठित हुए और मिलकर भू विकास योजना का विरोध किया तो यह संकट टल सकता है।अभी समय टला नहीं।"
        हिन्दुओ के आसाम को मुस्लिम न होने के लिए निम्न 3 बाते तत्काल होनी चाहिए।
      1)आसाम के हिन्दुओ को कांग्रेस की दास्यता से तत्काल मुक्त होना चाहिए।आसाम के नेताओ को यह ध्यान में रखना चाहिए की मुस्लिम बहुल बने आसाम का भस्मासुर कभी उनके मस्तक पर भी हाथ रख सकता है।हिन्दुओ को भावी अल्प संख्यकत्व के कारन आनेवाले संकट से रक्षा करनी है तो,तटस्थ हिन्दूओ को अभी इसी समय कांग्रेस के सिध्दान्तिक राष्ट्रीयत्व के शाप से मुक्त होना चाहिए।
       2)आसाम के हिन्दू ,महासभा के ध्वज के तले संगठित होना अत्यावश्यक है।क्यों की,भविष्यत् आसाम के गंभीर संकट को भापकर उसका विरोध हिन्दू महासभा ने आरम्भ कर अखिल हिन्दुस्थान का समर्थन प्राप्त करवाया है।आसाम में आज भी हिन्दू बहु संख्या में है इसलिए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मतदान नहीं कर हिन्दू हितदर्शी प्रत्याशी को ही मतदान करेंगे ऐसी प्रतिज्ञा करने से आसाम में प्रत्यक्ष हिन्दू मंत्री मंडल स्थापित होगा और पहाड़ी क्षेत्र में रहनेवाली हिन्दू जनजाति को भी निर्मनुष्य क्षेत्र में बसाकर प्रदेशव्याप्त करने में सहाय्यक बनेंगे।सरकारी भूमी आसाम की हिन्दू जाती-जनजाति के लिए ही आरक्षित रहेगी।
      3)आसाम हिन्दू सभा का सबल संगठन बनाकर सक्रीय हिन्दू नेताओ ने ऐसी योजना बनानी है की,आसाम और आसपास की पहाड़ी हिन्दू निवासियों तथा श्रमिक-किसान और बुध्दिजीवियों का आकर्षण बढे।आसाम का जो क्षेत्र विकास-वसाहत के नाम मुक्त रखा है वहा पैठ बनाकर स्थानीय निवासी बनने उन्हें मोह उत्पन्न हो ऐसी कार्यवाही करनी चाहिए।"
       राष्ट्रिय अध्यक्ष सावरकर जी के इस पत्र के पश्चात् आसाम हिन्दू सभा नेता तथा केन्द्रीय विधि समिति सदस्य अनंग दाम ने एक पत्रक द्वारा 1941 की जन गणना के अंकन प्रकट किये।" जन गणना के अनुसार आसाम में 1931 की हिन्दू जनसंख्या 52,04650 और मुस्लिम जनसँख्या 27,80514 थी वही 1941 में हिन्दू 45,40497 और मुसलमान बढ़कर 34,74141 हुए है। दूसरी ओर वन निवासी जन जातियों की संख्या 9,12390 से बढ़कर 18,32196 हुई। इसमें गड़बड़ी की आशंका के कारन हिन्दू सभा आसाम ने केंद्र और राज्य सरकार को पत्र लिखकर आसाम में फिर से जन गणना करने की मांग की। (संदर्भ 22 जुलाई 1941 अमृत बझार पत्रिका  कलामचा )
       द्वितीय विश्व महायुध्द के कारण युध्द सहयोग के लिए ब्रिटिश व्होईसराय ने 21जुलाई को अपने कार्यकारी मंडल का विस्तार करते हुए राष्ट्रिय रक्षा मंडल की घोषणा की।सावरकरजी ने हिन्दुओ के सैनिकी करण की धर्मवीर डॉक्टर मुंजे जी की प्रत्यक्ष कृति को साकार करने का यह सुअवसर समझा। 19नवंबर 1941 को कोलकाता के स्कॉटिश चर्च मिशन स्कुल में सैनिकी शिक्षा पर भाषण देकर आसाम का दौरा किया। अमिनगाव उतरकर नाव से पंडू गए।रायबहादुर दुर्गेश्वर शर्माजी ने उनका स्वागत कर पुष्प सज्जित मोटर से शोभायात्रा निकली।सत्तरेक मोटरों के साथ यही यात्रा 17 कि.मी. दूर गौहाटी गयी वहा श्री कामाख्या देवी के मंदिर में दर्शन और प्रबंधन से सन्मान पाकर आसाम हिन्दू महासभा अधिवेशन स्थल सावरकरजी पहुंचे।
        आसाम विधानसभा मंत्रिमंडल गोपीनाथ बारडोलाय के नेतृत्व में था।परन्तु,कांग्रेस के तुष्टिकरण निति के लिए मंत्री पद त्यागने के पश्चात् सादुल्ला खान के नेतृत्व में मुस्लिम लीगी मंत्री मंडल स्थापित हुवा और बहुसंख्यक हिन्दुओ से वन्य जन जातियों को विघटित कर अहोम,मिकी,खासी,छहरा आदी मतदार संघ बनाने का षड्यंत्र हो रहा था।निर्मनुष्य भूमि उपजाऊ करने की योजना को बंगाल से आ रहे मुसलमानों के लिए दिए जाने की शिकायत लेकर हिन्दू सावरकरजी के पास आये थे।जहा 5-25 मुस्लमान नहीं थे वहा तिन-चारसौ मुसलमान बसाये गए थे। इस अधिवेशन में सावरकरजी ने प्रदेश हिन्दू महासभा के मंच से धर्मान्तरितो का शुध्दिकरण,अछुतता निवारण,चुनाव और सैनिकीकरण का चार सूत्री कार्यक्रम दिया।
      गौहाटी से दिब्रुगढ प्रवास में 23 नवम्बर को सावरकरजी तिनसुकिया उतरे,यहा चाय बागान मालिको ने उनका सन्मान कर उपहार-जलपान कराया।मोटर से दिब्रुगढ पहुंचने पर 8 हाथी,घुड़सवार,वाद्यवृंद के साथ सशस्त्र सैनिको के बिच शोभायात्रा निकाली गयी।दोपहर 3 बजे जनसभा को संबोधित किया और दुसरे दिन शिवसागर पहुंचकर जनसभा संबोधित की।रंगपुर का शिवालय देखकर जोरहट में शोभायात्रा के पश्चात् जनसभा संबोधित करके परियानी से गौहाटी के लिए प्रस्थान किया।यहाँ बंगाली महासभा का सन्मान लेकर शिलोंग गए।स्वागत-शोभायात्रा के पश्चात् स्नान भोजन कर आसाम के शिक्षा मंत्री रोहिणीकुमार चौधरी आयोजित सन्मान अल्पभोज में उपस्थित रहे,यहाँ मुख्यमंत्री सादुल्ला खान अन्य मंत्री तथा यूरोपियन मण्डली उपस्थित थी।यहाँ निर्मनुष्य भूमि को उपजाऊ बनाने के बजाय मुसलमानों को बसाये जाने पर सावरकरजी ने चिंता व्यक्त की और नेहरू के इस विषय के अज्ञान जनक उत्तर पर तीखा प्रतिउत्तर दिया। संध्या में विशाल प्रांगण में 14-15 सहस्त्र हिन्दुओ की जनसभा को संबोधित किया।सव्वा घण्टे तक सावरकरजी ने हिन्दू जनता को कांग्रेस के मुस्लिम लीगी व्यवहार और षड्यंत्र से सावधान किया।' हिन्दू हित का रक्षण करनेवाली और हिन्दुराष्ट्र के स्वतंत्र,श्रेष्ठ तथा बलिष्ठ भविष्य के लिए लढ़नेवाली हिन्दू महासभा ही एकमात्र राजनीतिक संस्था है ! हिंदुत्व का अभिमान रखनेवाले हिन्दू कुल में जन्मे प्रत्येक हिन्दू स्त्री-पुरुष को हिन्दू महासभा का सदस्य बनना चाहिए।' शिलोंग में नव चैतन्य भर गया था। 26 नवम्बर को खासी वन जनजाती नेता से 1 घण्टे तक वार्ता की तत्पश्चात 3 मंत्रियो से गुप्तवार्ता, गुरूद्वारे में मत्था टेकाकर,हिन्दू मिशन संस्था में भाषण कर सावरकरजी वापसी के लिए निकले।
         1943 अप्रेल में बंगाल प्रान्त के प्रधान फझलुल हक्क को त्यागपत्र देना पड़ा उसके स्थान सुर्हावर्दी का शासन स्थापित हुवा।बंगाल में भयंकर अकाल का कारण बनाकर पूर्व बंगाल के बहुसंख्य मुसलमान योजना के अनुसार आसाम में स्थलांतर की आड़ लेकर पहुंचे।आसाम के मुसलमान मंत्रियो ने उन्हें निवासी भूमि प्रदान कर मुस्लिम जनसँख्या बढ़ाने का अवसर पाया। उसपर सावरकरजी ने पत्रक निकालकर आसाम के हिन्दू नेताओ को,' अकालग्रस्त शरणार्थी बनकर हो रही घुसपैठ को अनदेखा न करे,उन्हें रोकने का प्रबंध करे। अन्यथा वायव्य की तरह ईशान्य सीमा भी शत्रु के हाथ में होगी।' ऐसा आवाहन किया। (सन्दर्भ-अंग्रेजी साप्ताहिक मराठा-पुणे 1 अक्तूबर 1943)    
      अखिल भारत हिन्दू महासभा का तत्कालीन संदेश 2012 जुलाई में आसाम में उपजी हिंसा के पश्चात् भी अनदेखा किया गया तो बांगला बनने में देरी नहीं होगी।क्यों की,आसाम में कांग्रेस के साथ मुस्लिम लीग समकक्ष बांगलादेशी घुसपैठियों को आश्रय देकर मतदाता पहचान पत्र देनेवाला राजनितिक दल गठबंधन में है। अन्य प्रदेशो में भी घुसपैठ है और सरकारे उन्हें मतदाता बना चुकी है।परन्तु,आसाम सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण धर्मान्तरण हो या घुसपैठ, ईशान्य हिन्दुस्थान अशांत है।असामान्य चिंता का विषय है।
        सीमावर्ती तथा अन्य राज्यों के हिन्दू आनेवाले लोकसभा चुनाव के लिए " सर्व दलीय हिन्दू संसद " के लिए अपना प्रत्याशी चुनकर सार्वजनिक घोषणा करे। हिन्दू महासभा हिन्दुराष्ट्र के लिए समान नागरिकता लागु करने के लिए प्रतिबध्द है। वन्दे मातरम!

17 जून 2012

कश्यपनील स्वर्गभूमि-कश्मीर के धर्मांतरण की कहानी

कश्यप निर्मित सम्राट नील संवर्धित "कश-नील "सन ५९९ तक भिन्न हिन्दू राजघरानो के नेतृत्व मे रहा .आगे कर्कोटक वंश के प्रतापदित्याने संभाला.कर्कोटक वंश पश्चात् ८५५ अवंती वर्मा ने राजपाट सम्भाला. प्रानान्तिक रोग के बाद त्रिपुरेश पहाड़ी के ज्येष्ठेश्वर मंदिर मे अंतिम समय बिताया.९५८ क्षेम गुप्त पश्चात् व्यभिचारी रानी दिद्दा १००३ तक रही पश्चात् भांजा संग्राम राज ने तुर्क गझनी का महमूद से लोहा लेकर वापस भेजा.परन्तु बलात्कारित वंश पीछे छुटा,जिन्हें हर्ष के कार्यकाल मे सेना मे १% लेकर इस्लाम की घुसपैठ आरम्भ हुई.११०० मे उसकी मृत्यु पश्चात ११५० तक जयसिंह के कार्यकाल मे घुसपैठ बढ़ी,राजाश्रय मिला.१२५१ सहदेव ने इस्लामिस्टो को प्रशासन मे सहभागी किया,तिब्बती शरणार्थी राजकुमार रिन्चन उसके सहयोगी,धर्म प्रचारक शाहमीर को अधिकार के स्थान दिए.इसी कार्यकाल मे स्वातस्थान से प्रथम सूफी संत सैय्यद शाराफुद्दीन बुलबुल शाह और पर्शियन सरदार लंकर चाक्क शरणार्थी आये,चाक्क जमात कश्नील मे घुल मिल गयी.  ततार सेनापति दुल्चू के आक्रमण को शरणार्थी इस्लामिस्टोने दुल्चू की सहायता की,सहदेव के किश्तवाड़ पलायन बाद लुट,बलात्कार,धर्मान्तरण  हुवा.   जिस रिन्चन को सहदेव ने आश्रय दिया वह शाहमीर के षड़यंत्र का शिकार हुवा,उसने सेनापति रामचंद्र की हत्या कर गद्दी छीन ली और उसकी पुत्री कोटारानी से विवाह करने बौध मत का त्याग करने का मन बना ही लिया था शाहमीर और बुलबुल शाह  के दबाव मे इस्लाम का स्वीकार किया इस प्रकार कश्नील पर प्रथम इस्लामी शासक मलिक सदरुद्दीन बना,परन्तु सत्ता शाहमीर के पास थी, जिसके कारन कश्मीर बना.रिन्चन की मृत्यु १३२० बाद पुत्र हैदर और कोटारानी शाहमीर के कब्जे मे रहे.वीरांगना कोटारानी के बलिदान पश्चात् शाहमीर ने राजभाषा संस्कृत के जानकर पंडितो को साथ जोड़ा तो हमदानी बाप बेटे ने ७०० अनुयायी मिलकर धर्मान्तरण को गति दी. सिकंदर ने प्रधान मंत्री सुहा भट्ट को सैफुद्दीन बनाया और हिन्दू संस्कृति ध्वस्त की.उसके पुत्र जैनुल आबदीन ने राजभाषा फारसी बनायीं. असाध्य रोग को पंडित श्रीभट्ट ने ठीक किया तो संपत्ति नकारनेवाले वैद्यराज की मांग पर बंदी हिन्दू मुक्त किये लुटी सम्पत्ति लोटाई,धर्मान्तरण रोका। अमरनाथजी के दर्शन करने जाने लगा.

धर्मनिष्ठ श्री भट्ट ने सामाजिक विषमता नष्ट कर हिन्दू समाज को कश्मीरी पंडित बनाया.जैनुल पुत्र हैदर १४७४ कार्यकाल मे फिर वही आरम्भ हुवा.१ वर्ष मे २४,००० हिन्दू धर्मान्तरित किये.१४७५ बाद अत्याचार के विरोध मे चक्क शिया पंथी बने और सैय्यदो का विरोध करने हिन्दुओ का साथ दिया,धर्मंतारितो को शिया पंथ मे जोड़ा आगे युसूफ चाक्क ने १६ वि शताब्दी मे  कब्ज़ा किया तो उसके अत्याचार से मुक्ति पाने हिन्दुओने लाहोर सामंत मानसिंह से सहायता मांगी. युसूफ को हटाकर याकूब सत्तासीन हुवा उसके अत्याचार से हिन्दू ,सुन्नी त्रस्त हुए तब प्रतिनिधि मंडल शैख़ शरीफ और बाबा दावूद ख्की के नेतृत्व मे अकबर के पास आये,उसके मीर कासिम ने चाक्क सत्ता भंग की. विकास हुवा जहाँगीर ने मिरू पंडित को सेनापति बनाकर सत्ता संभाली,शाहजहाँ ने अली मर्दन को राज्यपाल तो पंडित महादेव को सलाहकार बनाया,परन्तु महादेव के विरोध मे ख्वाजा माफ़ ने षड्यंत्र किया. सन १६६६ शाहजह की मृत्यु बाद औरंगजेब ने अपने शासन कालमे १४ धर्मांध प्रशासक दिए, तिलक जनेऊ शिखा की रक्षा करने गुरु श्री तेग बहादुर सोढ़ी आगे आये और अपने शिष्य सतिदास,मतिदास,दयालदास के साथ चांदनी चौक मे बलिदान दिया.मुहमद शाह के कार्यकाल मे कश्मीर सूबेदार अब्दुल समद बना तब कुछ समय ठीक था ,अफ़ग़ान सरदार नादिर शाह का आक्रमण हुवा बाद मे अहमद शाह अब्दाली ने १७५२ मे अब्दुल्ला खान आया उसे अब्दुल हसन ,सुखजीवन मल्ला ने मार कर सत्ता संभाली मल्ला ने अब्दाली की सत्ता नकारी और एकात्मता स्थापित कर विकास किया.उसकी हत्या पश्चात् महामंत्री पंडित कैलाश धर कश्मीर छोड़ गए अफ़ग़ान सरदार लाल मुहम्मद खान ने कब्ज़ा कर लुट लिया,खुर्रम खान के सामने भाग खड़ा हुवा .खुर्रम ने कैलाश धर को सुबेदारी दी और काबुल गया तो मीर फकीरुल्ला को विरोध मे खड़ा किया गया,उसने बामबा जमात के धर्मंतारितो को हिन्दुओ के विरोध मे खड़ा किया .कट्टर पंथियों ने कैलाश धर की हत्या की.  सन १७७६ अफ्घान सरदार हाजी करिम्दाद खान ने कब्ज़ा किया जिजिया लगाया ,उसका पुत्र आज़ाद खान ने पंडित दिलाराम को महमंत्री नियुक्त किया उसे कट्टर पंथी यो ने सत्ताच्युत करवाया .सन १७७२ अफाघन मीर हाजर खान सत्ता मे आया उसने १७९३ दिलाराम की हत्या की.असंख्य हिन्दुओ की हत्या कर दल लेक मे डुबाया उसे काबुली सेना ने बंदी बनाया. १८०७ मे अत्ता मुहमद खान ने कश्मीर लिया बलात्कार की सीमा लांघी गयी,१८१३ अफ्घनी आझिम खान  ने सलाहकार सहजराम को नियुक्त किया.महाराजा रंजित सिघ के आक्रमण का आरोप हिन्दुओ पर मकर उन्हें निर्वासित कर दिया.

वीर सावरकर - एक संक्षिप्त इतिहास





हिन्दू सभा लाहोर की १३ अप्रेल १८८२ की स्थापना और २८ मई १८८३ भगुर-नासिक (महाराष्ट्र में) विनायक दामोदर सावरकरजी का आविर्भाव!

मई १८९८: पुणे में चापेकर बंधुओ को फांसी से क्रुध्द वीर विनायक की कुलदेवी अष्टभुजा के सन्मुख सशस्त्र क्रान्ति की प्रतिज्ञा

५ सितम्बर १८९९: पिताश्री का देहावसान

१ जनवरी १९००: नासिक में मित्र मेला की स्थापना

मार्च १९०१: मंगल परिणय

१९ दिसंबर १९०१: शालांत परीक्षा उत्तीर्ण

२४ जनवरी १९०२: फर्ग्युसन महाविद्यालय-पुणे प्रवेश

सावरकर एक संक्षिप्त इतिहास








हिन्दू सभा लाहोर की १३ अप्रेल १८८२ की स्थापना और २८ मई १८८३ भगुर-नासिक (महाराष्ट्र में) विनायक दामोदर सावरकरजी का आविर्भाव!

मई १८९८: पुणे में चापेकर बंधुओ को फांसी से क्रुध्द वीर विनायक की कुलदेवी अष्टभुजा के सन्मुख सशस्त्र क्रान्ति की प्रतिज्ञा

५ सितम्बर १८९९: पिताश्री का देहावसान

१ जनवरी १९००: नासिक में मित्र मेला की स्थापना

मार्च १९०१: मंगल परिणय

१९ दिसंबर १९०१: शालांत परीक्षा उत्तीर्ण

२४ जनवरी १९०२: फर्ग्युसन महाविद्यालय-पुणे प्रवेश

15 जून 2012

अखिल भारत हिन्दू महासभा के चुनाव लड़ने पर आपत्ति क्यों ?

अखिल भारत हिन्दू महासभा का आगामी लोकसभा चुनाव के लिए "सर्व दलीय हिन्दू संसद" का आवाहन !
2012 उ.प्र।विधानसभा चुनाव में हिन्दू महासभा के चुनाव में उतरते ही लोगो ने प्रश्न किये आप हिन्दू मत विभाजन के लिए चुनाव लड़कर कांग्रेस को सहायता कर रहे है ?
इसका उत्तर देने के लिए हमें 60 वर्ष पीछे जाकर नयी पीढ़ी को अवगत करना होगा। हिन्दू महासभा नेताओ ने रा.स्व.संघ का निर्माण परस्पर पूरक संगठन के रूप में किया था।1939 कोलकाता अधिवेशन में सावरकरजी तीसरी बार राष्ट्रिय अध्यक्ष चुने गए,डॉक्टर हेडगेवार राष्ट्रिय उपाध्यक्ष चुने गए परन्तु कार्यालय मंत्री रहे गुरु गोलवलकर महामंत्री पद के चुनाव में हार गए उसका ठीकरा सावरकरजी पर फोड़कर हिन्दू महासभा त्याग दी हेडगेवारजी ने उन्हें संघ में जिम्मेदारी सौपकर क्रोध शांत किया। हेडगेवारजी की अकस्मात् मृत्यु के बाद पिंगले को दरकिनार सर्वेसर्वा बने गुरूजी ने सावरकर विरोध के लिए जोगदंड को निकलकर संघ में सैनिकी शिक्षा बंद कर सावरकर को ' रिक्रूट वीर ' कहकर उपेक्षित किया। यह निजी द्वंद्व था ; संघ-सभाई परस्पर पूरक थे। 1945-46 लोकसभा चुनाव में हिन्दू महासभा पक्ष ने "कांग्रेस को मत अर्थात पाकिस्तान को मत कहकर प्रचार आरम्भ किया।" नेहरू ने सावरकर विरोधी गोलवलकर से मिलकर अखंड भारत का वचन देकर समर्थन माँगा। गुरूजी ने समर्थन दिया और जो संघी प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे थे उन्हें अंतिम दिन नामांकन वापस लेने का आदेश देकर हिन्दू महासभा को क्षति पहुंचाई।16% मत मिले कांग्रेस-लीग जित गयी.अंततः कांग्रेस ने हिन्दुओ की ओर से विभाजन करार पर हस्ताक्षर किये।
1949 अयोध्या आन्दोलन में हिन्दू महासभा को मिली सफलता का लाभ जनाधार में न बदले इसलिए नेहरू-पटेल के दबाव में गुरूजी ने हिन्दू महासभा तोड़कर भारतीय जनसंघ बनाया।हिन्दू महासभा प्रत्याशियों के विरोध में अपने प्रत्याशी उतारकर हिन्दू राजनीती का प्रत्यक्ष विरोध आरम्भ किया।यह व्यक्ति वर्चस्ववाद की लडाई अखंड हिन्दुस्थान-हिन्दू राजनीती के लिए हानिकारक बनी।
हिन्दू महासभा चुनाव क्यों लडती है ?
विधानसभा-परिषद,लोकसभा अर्थात शासन में हिन्दू मत को स्थान मिले।हिन्दुराष्ट्र प्राप्ति के दो मार्ग है।एक चुनाव लड़ने का दूसरा सैनिकी क्रांति का,चुनाव सभी वर्ग को मान्य ऐसा लोकतांत्रिक मार्ग है।इसलिए।
राज्य आपका ही है उसमे आपके उपस्थिति की क्या आवश्यकता? 
विगत वर्षो में देश का राज्य तथाकथित निधर्मी दलों के हाथ में है।उन्होंने राज्य को समर्थ करने के बजाय दुर्बल-प्रतिष्ठाहीन बनाया है।उसे सबल हिंदुत्वनिष्ठ करने के लिए हमें सत्ता चाहिए।
विश्व में निधर्मवाद प्रबल है और हिंदुत्वनिष्ठ कल्पना पुरानी नहीं है?
आप सच कहते है परन्तु,पाकिस्तान,बंगला,अफगानिस्तान,इरान,इराक,अरब राष्ट्र मुस्लिम है खंडित हिन्दुस्थान के आश्रयार्थी इस्लामी राष्ट्रवाद का पुरस्कार करते है।अखंड पाकिस्तान की अभिलाषा रखते है।
इंग्लॅण्ड,अमेरिका,यूरोपियन राष्ट्र ख्रिश्चानिती के पुरस्कर्ता है।धर्मान्तरण के लिए सहस्त्रो प्रचारक-धन भेजते है।चीन-रूस आदि देश साम्यवादी कहलाते है।यह सभी साम्राज्यवादी है।निधर्मी नहीं।फिर भी हमें निधर्मी बनाये रखने के प्रयास तुष्टिकरण की राजनीती से स्पष्ट रूप से निधर्मी नहीं है।यदि होता तो,मुसलमानों के लिए स्वतंत्र विधान,अल्प संख्यक आयोग,बहु विवाह,बहु संतति की अनुज्ञा विदेशी या विभाजन की भाषा उर्दू को मान्यता नहीं होती।विभाजन का इतिहास यह कहता है की,जहा मुसलमान बहुमत हुवा इस्लामी राज्य बना। हिन्दू शरणार्थी बने।यह दोहराया न जाये इसलिए उसे रोकने के लिए हिंदुत्वनिष्ठो का सबल राजनितिक मोर्चा बनाने हम प्रत्याशी खड़े करते है।
* यह कार्य जनसंघ (भाजप) नहीं कर रही है?
बिलकुल नहीं,क्यों की वह अपने आप को हिन्दू राष्ट्रवादी नहीं कहलाता।फिर वह हिन्दुहित की रक्षा कैसे करेगा?उनको भी मुस्लिम मतों की चिंता सताती है।मुस्लिम मतों के बिना चुनाव नहीं जित पाएंगे ऐसा सोचना आत्मघाती है।
* कैसे?
60/70% मतदान होता है,इनमे से आधे लोगो में हिन्दू स्वाभिमान,संगठन निर्माण कर पाए तो हिन्दू मतोपर चुनाव जीता जा सकता है।जो लोग चुनावी प्रक्रिया से दूर रहते है उनको विश्वास के साथ जोड़ना होगा।"हमें इस ही देश में हिन्दू बनकर रहना है,इसलिए हिन्दुओ को संकट में डालनेवाले विदेशनिष्ठ-भ्रष्टाचारी तथा गैरहिंदूओ को अन्याय लाभ पहुचानेवालो को एक भी वोट नहीं जायेगा !" ऐसा निश्चय पूर्वक कहेंगे!
आत्मविश्वास,पराक्रम,निष्ठां,सातत्य से योग्य दिशा में कार्य हुवा तो हिन्दुराष्ट्र निर्माण होगा।
          हिन्दू महासभा ब्राह्मणों की पार्टी है ऐसा आरोप होता है फिर जातीयवाद ग्रस्त हिन्दुओ का संगठन कैसे?
हिन्दू समाज जातीयवाद में विकेन्द्रित है,संविधानिक समान नागरिकता के लिए हिन्दू महासभा एक मात्र पार्टी 1985 से सर्वोच्च न्यायालय में लड़ रही है।राष्ट्रीयता में विषमता का राजनितिक लाभ उठानेवाले उसे लागु करने में बाधक है और उन्हें निधर्मी और हिन्दू महासभा को जातीयवादी-सांप्रदायिक कहा जाता है।हिन्दू महासभा ने जातिभेद तोड़क कार्य किये है, किसी जाती-पंथ के लोगो की सदस्यता पर प्रतिबन्ध नहीं है।पंडित मदन मोहन मालवीय,धर्मवीर मुंजे,वीर सावरकरजी ने अछुतता नष्ट करने सामाजिक विरोध झेलकर कार्य किया है।मुंजे-सावरकर ने हिन्दुओ में क्षात्र तेज बढ़ने सैनिकीकरण और धर्मान्तरितो का शुध्दिकरण का प्रयास-प्रचार किया है फिर हिन्दू महासभा केवल ब्राह्मणों की कैसी? ब्राह्मण अन्य दलों में भी है फिर वह भी ?
      *इतना सब कुछ होते विजय क्यों नहीं मिलती?
हम अपने विचार लोगो तक पहुँचाने में कम पड गए,जिन्हें विचार संयुक्त लगे उनमे से कुछ लोग पराजय से दुसरे दलों में चले गए।अन्य अनेक दलों में अनेक परिवर्तन हुए फिर भी हम वही है।हिंदुत्वनिष्ठ,विचारवंत, कर्मयोगी इस पार्टी में है।
   *आपको मत देने से जनसंघ-भाजप को हानि होगी कांग्रेस को लाभ,उसका क्या?
यह सभी दल गैर हिन्दुओ के मतों के लिए उनके पैर पकड़ते है,इसलिए इनमे से कोई गिरा या उठा कोई फरक नहीं पड़ता।उल्टा हम यह कहेंगे की, हिंदुत्वनिष्ठो के मत नहीं मिलने के कारन यह हार हुई ऐसा साक्षात्कार जब उन्हें होगा तब वह भी हिन्दू मत के लिए हिन्दुहित रक्षण की भाषा बोलने लगेंगे। तुष्टिकरण छोड़ेंगे। उन्हें पाठ पढाने गिराना कोई पाप नहीं, कर्तव्य है !
* कांग्रेस आपकी सहायता करती है ऐसी मान्यता है,क्या है सच।
वास्तविकता यह है की,हमारे कट्टरवादी दल के विरोध में निधर्मी दलों को विदेशो से धन मिलता है और करोडो रूपया खर्च होता है इसके विपरीत हमारे निर्धनता के कारन प्रत्याशी तयार नहीं होते,जो स्वखर्च से लड़ते है वह उस प्रमाण में प्रचार साहित्य-जनसभा-शोभायात्रा संपर्क नहीं कर सकते।दुसरे दलों के पास ख़रीदे प्रचारक होते है अब सोचिये किसको धन मिलता है। हमारे पराजय और देश के दुर्भाग्य का यह मुख्य कारन है।
पूर्व राष्ट्रिय अध्यक्ष अखिल भारत हिन्दू महासभा स्व.श्री.बालाराव उपाख्य शांताराम सावरकर का साक्षात्कार 
द.बा.फडणीस द्वारा दिनांक 19-5-1980 साप्ताहिक काळ में प्रकाशित 

12 नवंबर 2011

खलिस्तान एक बाँटने का षड्यंत्र !

                                         अखंड हिन्दुस्थान को बाँटने का षड्यंत्र            


तुम सुनो दि जेपु ढिग तुर्केसु अवेसु इमगाबो  l 
इक पीर हमारा हिन्दू मारा भाई धारा लय पावो ll                                                

       हे तेग बहादुर जगत उजागरता आकर तुर्क करो l सिस पाहे तव ही हम फिर सबही बन है तुरक भरो ll (पंथ प्रकाश)  गुरु श्री नानक देव जी-गुरु श्री गोबिंद सिंह जी प्रभु श्री राम पुत्रो की वंश लता है, ब्रिटिशो ने वीरो के बिच अलगाव पैदा कर विरोध की धार कम करने का जो षड़यंत्र किया परिणाम स्वरुप १८८९ लाहोर की सिख सभा का नेतृत्व गवर्नर पंजाब रॉबर्ट एजर्टन,वाइसराय लैंसडौन ने किया.श्री गुरुसिंह सभा के श्री. मानसिंह ने स्वर्ण मंदिर की ओर से रिपन को पत्र देकर समर्थन दिया.५ मार्च १८९२ गवर्नर जेम्स लायल ने खालसा कोलेज अमृतसर का शिलान्यास किया.हरी मंदिर साहिब अमृतसर में जो मुर्तिया स्थापित थी को 1905 में हटा दिया.        गुरु तेग बहादुर ले.डॉ.टी.सिंह  पृ.८३ पर लिखते है,"मुसलमानों ने यह सिध्द किया है की सच्चे सिक्ख और इस्लाम में आदि से अटूट अध्यात्मिक और सांस्कृतिक मेल रहा है."वास्तविकता तो यह है की,अरब्स्थान को रोमन अत्याचार से बचाने यहूदियों की दमिश्क में मिली प्रेरणा लेकर प्रेषित ने सामाजिक विषमता नष्ट करने अरबी हिन्दू कबायलीयो की ३५५ मूर्तियों को ३०० फीट ऊँचे शिवलिंग के साथ चिन्वाकर उस काब्बा की परिक्रमा करने की परिपाठी डालकर एकेश्वरवाद का  प्रसार किया.लीफ+लाम=वाउ +मीम =अ उ म =ॐ  हरुफे मुक्तआत धर्म ग्रन्थ में आरम्भ में अनेको बार उद्घृत है.जो परमात्मा एक है.श्री गुरु नानक देव जी ने इस्लाम का अध्ययन कर ही सामाजिक विषमता नष्ट करने पंथ बनाया था जो हिंदुत्व की रक्षा के लिए ही था.                                                

    सकल जगत में खालसा पंथ गाजै,जगे धर्म हिन्दू सकल भण्ड भाजै. (विचित्र नाटक-गुरु श्री गोबिंद सिंह)   जलियांवाला बाग़ हत्या काण्ड की दर्द भरी दास्ताँ से हम सबक नहीं ले पाए.पहली गोलमेज परिषद् दि.१२ नवं. १९३० लन्दन में हुई.मो.क.गाँधी ने आगाखा को विभाजन का कोरा धनादेश दे रखा था.ब्रिटिशो ने उनकी भेट कर पृथकतावादी प्रस्ताव रखा.अल्लामा इक़बाल की योजना साकार होती देख गाँधी ने फिर खलिस्थान- तमिललैंड की भी योजना रखी,अकाली नेता सरदार उज्जल सिंह-हिन्दू महासभा नेता डॉ.बा.शि.मुंजे, राजा नरेन्द्र नाथ ने वही विरोध कर विघटन को रोका था.                    
   १९४७ विभाजन के बाद पंजाबियों ने विशेष ट्रेन छोड़कर सबही विघटन वादी पाकिस्तान भेजे थे.डॉ.सिंह जैसे अध्यात्मिक साम्यता दर्शाने वालो की सोच और पाकिस्तान की सीमा से लगी पंजाब-कश्मीर में जो उन्माद पसरा है उसकी जड़ पाकिस्तान में है.खालिस्तान की मांग गलत है श्री गुरु जी के बन्दे वास्तविकता को समझे तो अखंड हिन्दुस्थान दूर नहीं.